जरी (संज्ञा)
सुनहले बादले से बुना हुआ एक वस्त्र।
मकोय (संज्ञा)
एक छोटे पौधे से प्राप्त खट्टा,गोल फल।
जांघ (संज्ञा)
कमर के नीचे और घुटनों के ऊपर का अंग।
निर्वाह करना (क्रिया)
आवश्यकता से कम में काम चलाना।
इमली (संज्ञा)
एक प्रकार की गूदेदार फली जो खटाई के काम आती है।
मसौदा (संज्ञा)
लेख का वह पूर्व रूप जिसमें काट-छाँट या सुधार किया जाना हो।
ब्रह्मचारी (संज्ञा)
संयमपूर्वक रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाला।
कायम (विशेषण)
जो चल न सके या जिसमें गति न हो।
आतिशबाजी (संज्ञा)
बारूद, गंधक, शोरे आदि के योग से बने हुए चक्र, अनार, पटाखे आदि जिनके जलने पर रंग-बिरंगी चिनगारियाँ निकलती हैं या आवाज होती है।
आत्मा (संज्ञा)
प्राणियों की वह चेतन शक्ति जिससे वे जीवित रहते हैं।