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हिन्दी शब्दकोश से समर शब्द का अर्थ तथा उदाहरण पर्यायवाची एवम् विलोम शब्दों के साथ।

समर   संज्ञा

१. संज्ञा / निर्जीव / अमूर्त / कार्य / शारीरिक कार्य

अर्थ : शत्रुतावश दो दलों के बीच हथियारों से की जाने वाली लड़ाई।

उदाहरण : महाभारत का युद्ध अठारह दिनों तक चला था।
समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध। जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध। - रामधारी सिंह 'दिनकर'

पर्यायवाची : अजूह, अनीक, अभेड़ा, अभेरा, अभ्यागम, आकारीठ, आजि, आयोधन, आहर, आहव, कंदल, जंग, पुष्कर, पैकार, प्रतिदारण, प्रसर, प्रहरण, भर, मृध, युद्ध, योधन, रण, लड़ाई, वराक, वाज, विशसन, वृजन, वृत्रतूर्य, संकुल, संग्राम, सङ्कुल, स्कंध, स्कन्ध

दोन पक्षांमध्ये शस्त्रांनी होणारी मारामारी.

युद्ध हे नेहमीच विनाशकारक असते
कंदन, झुंज, युद्ध, रण, रणकंदन, रणसंग्राम, लढा, लढाई, संगर, संग्राम, समर

The waging of armed conflict against an enemy.

Thousands of people were killed in the war.
war, warfare
२. संज्ञा / सजीव / जन्तु / पौराणिक जीव

अर्थ : एक देवता जो काम के रूप माने जाते हैं।

उदाहरण : कामदेव को शिव की क्रोधाग्नि का सामना करना पड़ा।

पर्यायवाची : अंगजात, अंगहीन, अंड, अण्ड, अदेह, अनंग, अनंगी, अनन्यज, अपांग, अबलासेन, अयुग्मबाण, अयुग्मशर, अशरीर, असमवाण, असमशर, आत्मज, आत्मजात, आत्मप, , कंदर्प, काम देवता, कामदेव, कार्ष्णि, कुसुमकार्मुक, कुसुमचाप, कुसुमधन्वा, कुसुमबाण, कुसुमायुध, कुसुमेषु, चित्तज, चेतात्मजा, चेतोजन्मा, चैत्रसखा, जराभीस, झषकेतु, झषांक, धानकी, नमुचि, निषद्वर, पंचबाण, पंचवाण, पंचशर, पंचसर, पुष्पकेतन, पुष्पचाप, पुष्पधन्वा, पुष्पध्वज, पुष्पपत्री, पुष्पशर, पुष्पशरासन, पुष्पायुध, प्रसूनवाण, भव, मकर ध्वज, मदन, मदराग, मधुसख, मधुसखा, मधुसहाय, मधुसारथि, मधुसुहृद, मनजात, मनमथ, मनसिज, मनोज, मनोभू, मन्नथ, मीनकेतन, मीनकेतु, मीनध्वज, मुहिर, रणरणक, रतिनाथ, रतिनाह, रतिराज, रतिवर, रमण, रवीषु, रागच्छन, रागरज्जु, रागवृंत, रागवृन्त, रुद्रारि, रूपास्त्र, वरीषु, वसंत-बंधु, वसंतसख, वसंतसखा, वसन्त-बन्धु, वसन्तसख, वसन्तसखा, वाम, विषमवाण, विषमविखिज, शंबरसूदन, शंबरारि, शम्बरसूदन, शम्बरारि, शारंग, शिखि, शुकवाह, शृंगारजन्मा, श्रीज, श्रीपुत्र, संकल्पभव, संकल्पयोनि, सारंग, सुप्रतीक, सुमसायक, स्मर, हृदयनिकेतन

काम या मनोवृत्तीचे रूप म्हणून मानला जाणारा एक देव.

भगवान शंकराने आपल्या तृतीयनेत्रातील अग्नीने मदनाला जाळून भस्म केले.
अनंग, कंदर्प, काम, कामदेव, कुसुमचाप, कुसुमशर, पुष्पधन्वा, मकरध्वज, मदन, मनोज, मनोभव, मीनकेतन, स्मर

चौपाल

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